श्री राम–नारद संवाद: माया, अहंकार-भंजन और भक्ति का दार्शनिक रहस्य
1. प्रस्तावना गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘श्रीरामचरितमानस’ का श्री राम-नारद संवाद भक्ति, दर्शन और ज्ञान की त्रिवेणी है। इस प्रसंग का बीजारोपण बालकाण्ड के नारद-मोह प्रसंग में होता है और इसकी दार्शनिक परिणति अरण्यकाण्ड में शबरी उद्धार के उपरांत होती है। आधुनिक दृष्टि से कई बार इस संवाद में प्रयुक्त भाषा को बिना संदर्भ के पढ़ने पर भ्रांतियाँ उत्पन्न हो…

अमित एक अनुभवी आईटी अन्वेषक और सत्य के खोजी हैं। उन्होंने लिखने का माध्यम इसलिए चुना है ताकि आम लोगों तक अपने अनुभव साझा कर सकें।





