श्री राम–नारद संवाद: माया, अहंकार-भंजन और भक्ति का दार्शनिक रहस्य

एक एकीकृत लेख प्रसार पर चार-पैनल पारंपरिक भारतीय लघु चित्र कला का चित्रण। लेआउट में हल्के चर्मपत्र पर जटिल सुनहरे और नीले रंग के फूलों के बॉर्डर हैं। पैनल 1 में भगवान राम को ऋषि नारद से मिलते हुए दिखाया गया है। पैनल 2 उनके स्नेही आलिंगन को दर्शाता है। पैनल 3 स्वयंवर में बंदर के चेहरे वाले नारद के अद्वितीय क्षण को दर्शाता है। पैनल 4 में राम और उनकी वानर सेना शामिल है। नया शीर्षक और पैनल हेडर दिखाई दे रहे हैं।

1. प्रस्तावना गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘श्रीरामचरितमानस’ का श्री राम-नारद संवाद भक्ति, दर्शन और ज्ञान की त्रिवेणी है। इस प्रसंग का बीजारोपण बालकाण्ड के नारद-मोह प्रसंग में होता है और इसकी दार्शनिक परिणति अरण्यकाण्ड में शबरी उद्धार के उपरांत होती है। आधुनिक दृष्टि से कई बार इस संवाद में प्रयुक्त भाषा को बिना संदर्भ के पढ़ने पर भ्रांतियाँ उत्पन्न हो…

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